امید
دوشنبه، 2006/04/17
شعر از دوئي بوسوئي (ژاپني)
اميد
به گاهي كه باد، چيره بر امواج سپيد،
در دريا مي توفد،
ماه
شبانگاه در آب مي غروبد،
و سياهي سلطه مي گستراند،
روشني ستاره اي
يافت خواهد شد تا
زورقم را
سوي تو براند،
اي آسماني.
به گاهي كه چشم از خوابي بر خواهي گرفت،
درباره ي زندگي بلندمان،
و باز خواهي گشت
به زمين مرده،
گره هاي شكنجه هايت خواهند گشاد.
آن گاه خدايي صدايي خواهد بود
تا فرا خواند جان مرا سوي تو
در گور.
تو اي كشتيبان زندگي در درياي
اندوه ها، نگراني ها و دردها!
كودكان خاك آلود،
در رويا حتا مي گريي؟
بگذار حتا باد يا باران
هياهو ببارد بر خيزآب ها
در اين سپنجي سرا،
تو تاب خواهي آورد. چه تو،
همذات بوي گلي.
در روش رود واژه اي يافت خواهد شد،
كه دوان مژده دهد:
‹به خليجك ما هم
رسيد بهار›
خلسه ها و شعله هايي خواهند يافت شد،
مر گر گرفتن را
الهامي خواهد زاد،
در ابرهاي خرامان در آسمان
هشداري در توفان،
و پاسي از شب رفته،
اميد نيز به قلب آدمي خواهد تراويد.
متن اصلي شعر ‹اميد›
НАДЕЖДА
[ Дои Бансуй ]
НАДЕЖДА
Когда бушует в море ветер,
Владея белыми волнами,
Луна в ночи заходит в воду,
И вскоре воцарится темнота.
Тогда найдется звездный свет, что гонит
К тебе, небесной,
мою лодку.
Когда очнешься ото сна
О жизни нашей очень долгой
И возвратишься к мертвенной земле
Распустятся узы твоих терзаний.
Тогда найдется божий глас, ведущий
К тебе, в могиле,
мою душу.
Приняв корабль жизни в море
Скорби, беспокойства и мучений,
Дитя в пыли, ты плачешь даже
В сновиденье?
Ты терпишь, как пусть даже ветер или дождь
Несет зловещий шум на волнах
В бренный мир. Ты - сродни запаху
цветка.
Найдется слово у течения реки,
Спешащей сообщить: "Весна пришла
и в нашу бухту".
Найдутся думы и у пламени,
Способного пылать.
Найдется откровение у облака,
Плывущего по небу,
Увещевание у бури,
заполуночь
Найдется и надежда в сердце человека.